कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती,

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

ये पंक्तियां ‘सोहनलाल द्विवेदी’ जी की एक बहुत ही सुंदर एवं प्रेरणादायक रचना ‘कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती’ से ली गई हैं। जब-जब हृदय विचलित होता है, निराशाएँ मन को घेर लेती हैं, तब-तब ये पंक्तियाँ किसी भी हारे हुए मन को एक नया जोश, नई उमंग प्रदान करती है।

जीवन एक चुनौती है, हमें इसे स्वीकार करना चाहिए। दुनिया में ऐसे बहुत-से लोग है जो कोशिश तो करते हैं, लेकिन उन्हें अपने जीवन में बार-बार हार का सामना करना पड़ता है। इस कारण वे हिम्मत हार जाते हैं और ये मान लेते हैं कि वे कभी सफल नहीं हो पाएँगे; सफलता उनकी किस्मत में है ही नहीं। अगर हम असफल होते हैं, तो इसका अर्थ है कि हम अपना सौ प्रतिशत उस कार्य को करने में नहीं लगा रहे हैं। हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि हम कभी कामयाब नहीं हो सकते हैं; इसलिए हमें मेहनत नहीं करनी चाहिए। यह एकदम गलत सोच है।

हमें अपनी हार का कारण पता करने का प्रयास करना चाहिए। यदि हम एक-दो बार के प्रयास से ही हार मान लेंगे, तो हम सदैव हारे ही रह जाएँगे। हमें अपने अंदर सहनशीलता तथा हिम्मत रखनी चाहिए।

जीवन में सफल होने के लिए हमें सदैव निरंतरता बनाए रखना चाहिए, नियमित रूप से कार्य करना चाहिए। कई बार यदि कोई रुकावट या मुश्किल का सामना करना पड़े तो भी हमें धैर्य नहीं खोना चाहिए और अपने लक्ष्य को सामने रखकर अभ्यास में जुटे रहना चाहिए।

इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण है जिन्होंने बार-बार कोशिश करने के बाद ही सफलता पाई है। असफलताओं से उन्होंने हार नहीं मानी, अपनी हार से शिक्षा ली और अंततः सफल भी हुए। अमरिका के राष्ट्रपति 26 बार चुनाव के लिए खड़े हुए और हारे; किंतु अंत में वे अमेरिका के राष्ट्रपति भी बने। इसी प्रकार राबर्ट ब्रूस जिसकी युद्ध में निरंतर पराजय हो रही थी, एक गुफा में छुपकर बैठ गया। वहीं उसने देखा कि एक मकड़ी दीवार पर चढ़ने की कोशिश कर रही थी। अपनी कोशिश के दौरान वह छह बार नीचे गिरी, किंतु सातवीं बार में वह सफल हो गईं। इस घटना से राबर्ट ब्रूस इतना उत्साहित हुआ कि उसने एक बार और युद्ध करने का निश्चय किया और सफलता प्राप्त की। एडिसन जिन्होंने बिजली के बल्ब का आविष्कार किया; वे 1000 बार असफल हुए थे।

सफलता एक दिन में नहीं मिलती। अभ्यास, अपने ऊपर विश्वास एवं कभी हार न मानने की प्रवृत्ति; यदि किसी व्यक्ति में ये तीन गुण है, तो वह अवश्य ही सफल होगा।

यदि एक बार हार कर हम प्रयास करना छोड़ दें, तो हमारी पहले की हुई मेहनत भी व्यर्थ हो जाती है। कोशिश हमें तब तक करनी चाहिए, जब तक सफलता हमारे कदम न चूम ले। हमें कर्म करते रहना चाहिए, फल की इच्छा किए बिना। हमारे कर्म अगर सही दिशा में हैं, तो हमारी मेहनत अवश्य ही फलित होगी।

‘‘असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,

क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।

जब तक न सफल हो, नींद-चैन को त्यागो तुुम,

संघर्ष का मैदान छोड़कर मत भागो तुम,

कुछ किए बिना ही जय-जयकार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।’’